चरित्रहीन!

मैं समझता हूं कि चरित्रहीनता को हम समझ नही सके,आमतौर पर हम चरित्रहीन होने को यौनसम्पर्क से सम्बंधित कर देते है;किन्तु ये बिल्कुल गलत अवधारणा रही है हमारी..
चरित्र शब्द का बिल्कुल दोहन है ऐसे उद्धरण, क्योंकि चरित्रहीनता कभी भी सेक्स से परिभाषित नही हो सकती,ये बड़ी भूल हो गयी हमसे अबतक।
चरित्र का का सम्बन्ध दया,करुणा,सम्वेदना,अहिंसा,सामाजिकता और प्रेम प्रदर्शन के आयामों से होना चाहिए....
जहां तक यौन सम्बन्ध और चरित्रहीनता के सम्बंध के विषय मे जो कुछ यथोचित निर्धारण हो वो योन अत्याचारों के सम्बंध में होना चाहिये....
इस तरह की मान्यताओं से हम शक्ति सम्पन्न एवं सुंदर चरित्र का सृजन कर सकते है,जो समाज और संसार को प्रेम एवं सौहार्द से भर सकते है,और समाज का एवं व्यक्तित्व का उर्द्धगमन कर सकते है।

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