संकल्प-साधना

सबसे पहले आपका स्वस्थ होना जरूरी है,ततपश्चात आपकी चेतना का परिमार्जन होना भी जरूरी है।
ख्वाहिशें फिर जरूरी होती है,
और ख्वाहिशों को पंख देने के लिए जरूरी है गहनता,
जो आपके विचारों से,अभ्यास से,एवं सबसे आवश्यक धैर्य से प्रतिपूरित होती है!
दूसरी बात,जब आप साधना में होते है,तो आपके संकल्प के आंकलन के लिए सृष्टि प्रतिपल आपको चुनौतियाँ देती रहती है,जिससे आपकी गहनता और समर्पण का भान उसे होता रहे।

और फिर तीसरा चरण है संकल्प सिद्धि प्रारभ का,अर्थात आप अब अपने मेहनत का परिणाम पा रहे होते है....

और यही संकल्प-सिद्धि सूत्र है!
धन्यवाद!

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