साथी.

तुम्हारे साथ मैं था कुछ देर तक
फिर तुम साथ हो लिये,
और अब ये साथ अखण्ड है
मैं भी तुम्हारे साथ हूँ हमेशा
तुम्हे महसूस भी होता होगा,
तुम्हारे साथ जो गुजरा मैं
तुम्हारे साथ बिताए हुए क्षण
क्षणिक नही है,इसमे मेरा कुछ भी नही
सब तुम्हारा स्नेह,समर्पण, वात्सल्य
और श्रृंगार भी,
मुझे यूँ ही नही मिला,
मेरे किसी जन्म के पुण्यकर्मों का प्रतिफल है ये,
आशातीत तुम्हारा मिलन
दिव्यता का ब्रह्मांड हमारा साथ,हमारी कृणाएँ,
हमारे व्यक्तित्व को इतना सबल और सुंदर बनाएंगी
जिसकी हमने कभी कल्पना नही की होगी,
तुम्हे धन्यवाद,मेरे योगेश्वर को धन्यवाद,
मैं उन समस्त अनुभूतियों को व्यक्त कर पाऊंगा!
क्योंकि जो कुछ भी हुआ है
वो कभी कभी किसे विरले के ही जीवन मे होता है
है साथी तुम्हे धन्यवाद,कोटि कोटि धन्यवाद,
"इतनी जल्दी ही ख्वाहिशें पूरी हुई,
तो जिम्मेदारी देने के लिए"
हम दोनो चाहे जहा हों
हमे प्रेम और करुणा बाटना है
इतना प्रेम इतना प्रेम
की कोई नास्तिक,भक्त हो जाये,
कोई अंगुलिमाल परिवर्तित हो जाये,
कोई रत्नाकर ..कालिदास हो जाये!
इतनी करुणा इतनी करुणा
इतनी दानशीलता की कोई दानवीर कर्ण
अनाथ न रहे,ये हमारी जिम्मेदारी है
हालांकि सब करेंगे योगेश्वर हम माध्यम है मात्र,
और इसका हमे अहंकार नही करना
और कोई शिकायत भी नही!
हमारे प्रेम का वही स्मारक होगा
हमारे जाने के बाद!

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