क्षमादान(forgiveness)
जो लोग भी तनाव में है,या कुंठा में जीवनयापन कर रहे है उनके लिये ये लेख समर्पित कर रहा हूँ।
प्रिय मित्र!
तुम परेशान बहुत हो,तुममे कुछ शिकायतें है लोगों से,अपनी खुद की परिस्थितियों से,रिश्तों से,ज़िंदगी तुम्हारे मुताबिक नही चल रही है इससे,आदि आदि...
मैं एक छोटी सी ध्यान पद्धति बता रहा हूँ इसको करो तुम प्रफुल्लित हो जाओगे! प्रसन्नता और आत्मविश्वास से सराबोर हो जाओगे ये मेरा वादा है...
सबसे पहले एक आरामदायक स्थान चुनो जहाँ तुम्हे कोई भी डिस्टर्ब न करे,फिर आराम से लेट जाओ,और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दो,5 मिनट तक खुद को जितना सहज कर सकते हो करो...
उसके बाद अपने दोनों भृकुटियों के मध्य में अपने ध्यान को ले जाओ,और एक चीज का ख्याल रखो की इस प्रक्रिया में उस बिंदु पे दर्द न हो....अर्थात बिल्कुल सहज होकर...भृकुटि के मध्य में ध्यान ले जाकर...
धीरे-धीरे अपनी समस्त शिकायत वाले मुद्दों को क्रमानुसार लाना है और साहस कर के उन समस्त घटनाओं के हेतु को क्षमा करते जाना है... और ये क्षमादान की प्रक्रिया तब तक चले जबतक शिकायतें खत्म न हो जाये...
उसके बाद एक ऊर्जा का संचार होगा,
फिर समस्त प्रकृति को अनुग्रह अर्पित करना...
इति..
प्रिय मित्र!
तुम परेशान बहुत हो,तुममे कुछ शिकायतें है लोगों से,अपनी खुद की परिस्थितियों से,रिश्तों से,ज़िंदगी तुम्हारे मुताबिक नही चल रही है इससे,आदि आदि...
मैं एक छोटी सी ध्यान पद्धति बता रहा हूँ इसको करो तुम प्रफुल्लित हो जाओगे! प्रसन्नता और आत्मविश्वास से सराबोर हो जाओगे ये मेरा वादा है...
सबसे पहले एक आरामदायक स्थान चुनो जहाँ तुम्हे कोई भी डिस्टर्ब न करे,फिर आराम से लेट जाओ,और पूरे शरीर को ढीला छोड़ दो,5 मिनट तक खुद को जितना सहज कर सकते हो करो...
उसके बाद अपने दोनों भृकुटियों के मध्य में अपने ध्यान को ले जाओ,और एक चीज का ख्याल रखो की इस प्रक्रिया में उस बिंदु पे दर्द न हो....अर्थात बिल्कुल सहज होकर...भृकुटि के मध्य में ध्यान ले जाकर...
धीरे-धीरे अपनी समस्त शिकायत वाले मुद्दों को क्रमानुसार लाना है और साहस कर के उन समस्त घटनाओं के हेतु को क्षमा करते जाना है... और ये क्षमादान की प्रक्रिया तब तक चले जबतक शिकायतें खत्म न हो जाये...
उसके बाद एक ऊर्जा का संचार होगा,
फिर समस्त प्रकृति को अनुग्रह अर्पित करना...
इति..
Comments