पथ! भारत के!

बिगड़ गयी वो बात पुरानी,
लिखो आज एक नयी कहानी,
दोषारोपण छोड़ो अपनो पर,
हम सब इस देश के वासी है।।

आओ कुछ नए आयाम लिखे,
भारत की दिव्य मिशाल लिखें,
शिक्षा कि दिव्य धरोहर हम,
आओ नूतन एहसास लिखें।।

खोमचे वाले,चाय वाले फेरी वाले
रिक्शेवाले ,ऑटो वाले,चाट वाले,
फुलकी वाले.....और
खेतों के सब कृषक मतवाले।।

ये सब इस देश के अनुपम निधि के,
एक एक अंशों को भरते हैं,
अफसोस जरा सा मुझको है,
जो पढ़े लिखे वो लूटते हैं।।

जो भटक गए चेतनता से,
उनको भरो मानवता से,
है काम नही ये...सरल
किन्तु यदि हो चित निर्मल।।

सब कुछ यहाँ पर मुमकिन है,
संकल्प यदि कर लिए... भरत!
फिर विश्व विजय भी मुमकिन है...
कर्म किये गर हम अनवरत।।

छोड़ो मजहब की चादर को,
और जातिगत दीवारों को,
एक कुशल राष्ट निर्माण करो
हे भारत! तुम आगाज़ करो! आगाज करो!

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