शौच!
शौच..अर्थात मल निरसन,
ये बहुत महत्वपूर्ण शब्द है,शारिरिक स्तर पर भी
और आत्मिक स्तर पर भी।
जब हम भोजन ग्रहण करते तो हमारा पाचन तंत्र भोजन के महत्वपूर्ण अंशों को शरीर मे समाहित करके अपशिष्ट को निर्गत कर देता है,जो मल मूत्र के रूप में हम शौचालय में त्याग देते है,और इस दौरान ध्यान देने वाली बात ये है कि
हममे से प्रत्येक को मल मूत्र से तनिक भी आसक्ति नही रहती।
हम दुबारा उस निर्गत मल मूत्र की तरफ दृष्टि तक नही डालते
और शरीर हल्की और स्फूर्त हो जाती है।
अब मैं बात करूंगा आध्यत्मिक स्तर की,आध्यत्मिक शौच भी अत्यावश्यक है,क्योंकि इस शौच से हम अपने आत्मा ,और मनः चेतना को स्वच्छ और सुंदर बनाते है।
इसके लिए हमने देवालय बनाये,देवालयों का मात्र इतना ही महत्व है,ईसाई कन्फेशन करते है!
देवालय अर्थात ध्यान स्थलों का ये बहुत गुह्य महत्व है और हममे से कदाचित विरले लोग इस अर्थ से परिचित है!
हम प्रत्येक पल संसार मे विभिन्न विचार और भाव ग्रहण करते है,और उन भावों के साथ हमारी चेतना भी वही कार्य करती है जो हमारा पाचन तंत्र भोजन के साथ करता है।
इसलिए आवश्यक है कि हम दूसरे शौचालय का भी अर्थ समझें और समय समय पर अपनी आत्मा को स्वच्छ और सुंदर बनाए।
मूलतः तब ही हम त्याग के महत्व को समझ सकेंगे और कब्ज से मुक्ति मिलेगी।
ये बहुत महत्वपूर्ण शब्द है,शारिरिक स्तर पर भी
और आत्मिक स्तर पर भी।
जब हम भोजन ग्रहण करते तो हमारा पाचन तंत्र भोजन के महत्वपूर्ण अंशों को शरीर मे समाहित करके अपशिष्ट को निर्गत कर देता है,जो मल मूत्र के रूप में हम शौचालय में त्याग देते है,और इस दौरान ध्यान देने वाली बात ये है कि
हममे से प्रत्येक को मल मूत्र से तनिक भी आसक्ति नही रहती।
हम दुबारा उस निर्गत मल मूत्र की तरफ दृष्टि तक नही डालते
और शरीर हल्की और स्फूर्त हो जाती है।
अब मैं बात करूंगा आध्यत्मिक स्तर की,आध्यत्मिक शौच भी अत्यावश्यक है,क्योंकि इस शौच से हम अपने आत्मा ,और मनः चेतना को स्वच्छ और सुंदर बनाते है।
इसके लिए हमने देवालय बनाये,देवालयों का मात्र इतना ही महत्व है,ईसाई कन्फेशन करते है!
देवालय अर्थात ध्यान स्थलों का ये बहुत गुह्य महत्व है और हममे से कदाचित विरले लोग इस अर्थ से परिचित है!
हम प्रत्येक पल संसार मे विभिन्न विचार और भाव ग्रहण करते है,और उन भावों के साथ हमारी चेतना भी वही कार्य करती है जो हमारा पाचन तंत्र भोजन के साथ करता है।
इसलिए आवश्यक है कि हम दूसरे शौचालय का भी अर्थ समझें और समय समय पर अपनी आत्मा को स्वच्छ और सुंदर बनाए।
मूलतः तब ही हम त्याग के महत्व को समझ सकेंगे और कब्ज से मुक्ति मिलेगी।
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