मंगल सूत्र(the divine relationship)
हम सनातन परंपरा के एक एक शब्द के ऋणी है,इतने अद्भुत दिव्य शब्द हमे अन्यत्र नही मिलते,मुझे ये उद्घोषणा करने में असीमित तृप्ति मिल रही है,संस्कृत का एक शब्द "तत्वमसि"
जो एक अद्भूत शब्द है,हमारी आध्यात्मिक चेतना का शिखर रूप प्रदर्शित करता है....
और स्त्रियों को देवी रूप में परिभाषित करने वाला एक विशद शब्द मंगलसूत्र जो हृदयस्पर्शी है...
तुमसे कोई बाध्यता नही है,सन्तान उत्पन्न हो तो वो भी दिव्य,मंगल सूत्र से....जिसका साक्षी भी कौन है,सम्पूर्ण प्रकृति(क्षिति जल पावक गगन समीर)....विचारणीय तथ्य है ये
भारतीय संस्कृति का अद्भुत शब्द जिसका बोध हो अगर तो...हम बुद्ध, महावीर,कृष्ण, कबीर,कलाम जीसस जैसे लोगों का सृजन करते है....
मैं मानता हूं कि ये शब्द ही भारतीयों के अध्यात्म को प्रदर्शित करता है....बिना मंगल सूत्र के ये सम्भव नही हो सकता कदापि नही...
हमारे ऋषियों की ये परम्परा रही है कि योग्य को देख के ही ज्ञान प्रदान किया जाता है,,,नही योग्य मिला तो गीता भी अदृश्य हो जाये! कोई फर्क नही पड़ता।
कुलबुलाहट नही है हममे, आज पूरा विश्व परमाणु हमलो के सम्भावनाओ से आतंकित है...ये क्यों हो रहा है ओछे लोगों को दिव्य ज्ञान दे दिया गया मात्र इसी वजह से।।
हम अर्थात सनातनी किसी बाध्य क्षेत्र के वासी नही है बल्कि असीम है,
प्रशिक्षण देना होगा प्रेम का
प्रेम पुनः सिखाना होगा,
इसके बगैर ये धरा बंजर हो जाएगी
आज लोग क्षद्म शक्तियों को प्राप्त करके ही आतंक का सृजन कर रहे है,उन्हें मंगल सूत्र को ध्यान में रखकर ही सन्तान उतपत्ति करना चाहिये जिससे फिर कोई जीसस, बुध्द,सृजित हो सके!
हम शक्ति के पूजक है
हमारे महादेव भी शक्ति के आगे नतमस्तक है
हमे समझना होगा स्त्री महात्म्य को तभी कोई शांतिदूत आ पायेगा इस धरा पर!
जो एक अद्भूत शब्द है,हमारी आध्यात्मिक चेतना का शिखर रूप प्रदर्शित करता है....
और स्त्रियों को देवी रूप में परिभाषित करने वाला एक विशद शब्द मंगलसूत्र जो हृदयस्पर्शी है...
तुमसे कोई बाध्यता नही है,सन्तान उत्पन्न हो तो वो भी दिव्य,मंगल सूत्र से....जिसका साक्षी भी कौन है,सम्पूर्ण प्रकृति(क्षिति जल पावक गगन समीर)....विचारणीय तथ्य है ये
भारतीय संस्कृति का अद्भुत शब्द जिसका बोध हो अगर तो...हम बुद्ध, महावीर,कृष्ण, कबीर,कलाम जीसस जैसे लोगों का सृजन करते है....
मैं मानता हूं कि ये शब्द ही भारतीयों के अध्यात्म को प्रदर्शित करता है....बिना मंगल सूत्र के ये सम्भव नही हो सकता कदापि नही...
हमारे ऋषियों की ये परम्परा रही है कि योग्य को देख के ही ज्ञान प्रदान किया जाता है,,,नही योग्य मिला तो गीता भी अदृश्य हो जाये! कोई फर्क नही पड़ता।
कुलबुलाहट नही है हममे, आज पूरा विश्व परमाणु हमलो के सम्भावनाओ से आतंकित है...ये क्यों हो रहा है ओछे लोगों को दिव्य ज्ञान दे दिया गया मात्र इसी वजह से।।
हम अर्थात सनातनी किसी बाध्य क्षेत्र के वासी नही है बल्कि असीम है,
प्रशिक्षण देना होगा प्रेम का
प्रेम पुनः सिखाना होगा,
इसके बगैर ये धरा बंजर हो जाएगी
आज लोग क्षद्म शक्तियों को प्राप्त करके ही आतंक का सृजन कर रहे है,उन्हें मंगल सूत्र को ध्यान में रखकर ही सन्तान उतपत्ति करना चाहिये जिससे फिर कोई जीसस, बुध्द,सृजित हो सके!
हम शक्ति के पूजक है
हमारे महादेव भी शक्ति के आगे नतमस्तक है
हमे समझना होगा स्त्री महात्म्य को तभी कोई शांतिदूत आ पायेगा इस धरा पर!
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