कुत्ते की हड्डी!
टट्टी-पेशाब सड़क पे ही करेंगे
शहरो को गंदा रखना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है,
पड़ोसी की शक्ल देखना न उनको पसन्द है न उनके पड़ोसी को उनका,
बेटे के विवाह में दहेज जरूर लेंगे,न मिलने पर बहुओं को जला तक देंगे,
दोस्त, धर्म और हृदय जैसे अनेको शब्द उनके जुबान पर है,उसका मतलब रत्ती भर नही जानते,
पत्नी,बहन,भाई, बाप,से कभी कभी बात होती है उनकी
अगर वो पुरुष है तो उनको संसार की सारी महिलाओं को छेड़ने में कोई गुरेज नही,किन्तु यदि उनकी बहन,बेटी किसी पुरुष से प्रेम करले तो उनकी त्यौरियां चढ़ जाती है,मन मे उनके एक सैलाब उमड़ आता है,
वो रिश्वत लेते है,और देते है
कानून तो उनके पाकिट में रहता है,जब जी आया निकाल के चिट-चिट करके तोड़ लिया करते है,
और मां बहन की गलियां उनके चेहरे के आभूषण है,
ये लोग वो कुत्ते है,जिनको राजनेता एक सुखी हड्डी दे देता है
और ये सुखी हड्डी कभी असहिष्णुता की होती है,कभी साम्प्रदायिक उन्माद,या जातीय भेदभाव का होती है,....आदि आदि
ये कुत्ते अनवरत काल तक उस हड्डी
को काटते है,ये कुत्ते इतने मूर्ख होते है कि इन्हें इतना भी मालूम नही कि वो अपने खून को पी रहे है,हड्डी के चक्कर मे!
ये नेता बड़े चतुराई से अपने घर का खर्च चलाते है
और कुत्ते दुम भी हिलाते रहते है भावविभोर होकर....
माफ करिये ये लोग,भारतीय नही है,
ये न हिन्दू है न मुस्लिम है,
ये तो नशेड़ी है नशेड़ी है!
जैसे ये कम होते जाएंगे
मुल्क और जहांन जन्नत होने लगेगा
जैसे जैसे ये लोग बढ़ेंगे..... जहन्नुम ...
जय हिंद! जय भारत!
शहरो को गंदा रखना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है,
पड़ोसी की शक्ल देखना न उनको पसन्द है न उनके पड़ोसी को उनका,
बेटे के विवाह में दहेज जरूर लेंगे,न मिलने पर बहुओं को जला तक देंगे,
दोस्त, धर्म और हृदय जैसे अनेको शब्द उनके जुबान पर है,उसका मतलब रत्ती भर नही जानते,
पत्नी,बहन,भाई, बाप,से कभी कभी बात होती है उनकी
अगर वो पुरुष है तो उनको संसार की सारी महिलाओं को छेड़ने में कोई गुरेज नही,किन्तु यदि उनकी बहन,बेटी किसी पुरुष से प्रेम करले तो उनकी त्यौरियां चढ़ जाती है,मन मे उनके एक सैलाब उमड़ आता है,
वो रिश्वत लेते है,और देते है
कानून तो उनके पाकिट में रहता है,जब जी आया निकाल के चिट-चिट करके तोड़ लिया करते है,
और मां बहन की गलियां उनके चेहरे के आभूषण है,
ये लोग वो कुत्ते है,जिनको राजनेता एक सुखी हड्डी दे देता है
और ये सुखी हड्डी कभी असहिष्णुता की होती है,कभी साम्प्रदायिक उन्माद,या जातीय भेदभाव का होती है,....आदि आदि
ये कुत्ते अनवरत काल तक उस हड्डी
को काटते है,ये कुत्ते इतने मूर्ख होते है कि इन्हें इतना भी मालूम नही कि वो अपने खून को पी रहे है,हड्डी के चक्कर मे!
ये नेता बड़े चतुराई से अपने घर का खर्च चलाते है
और कुत्ते दुम भी हिलाते रहते है भावविभोर होकर....
माफ करिये ये लोग,भारतीय नही है,
ये न हिन्दू है न मुस्लिम है,
ये तो नशेड़ी है नशेड़ी है!
जैसे ये कम होते जाएंगे
मुल्क और जहांन जन्नत होने लगेगा
जैसे जैसे ये लोग बढ़ेंगे..... जहन्नुम ...
जय हिंद! जय भारत!
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