महिमा नरायण की!

कैसे न कह दूं मैं,
सब कुछ दिया तूने,
जो भी जब भी मांगा,
सब कुछ दिया तूने!।।

भर गए नैन मेरे ,
जब जब तुम याद आये,
हे! नाथ तुम मेरे,
हर अंश में दिखते हो।।।

इतना अनुग्रह है ,
कि सागर भर जाये,
कैसे न कह दूं मैं,
सब कुछ दिया तूने!।।

जब-जब तूफानों ने,
मुझको झकझोर दिया,
तुम मरहम बन मेरे,
हर घाव भर दिए हो!।।

अब तो हर क्षण-कण में
बस तुम ही तुम हो,
है फिक्र तुम्हारी ही,
तन-मन मे रहती है।।

इतना अनुग्रह है,
कि सागर भर जाए,
कैसे न कह दूं मैं
सब कुछ दिया तूने!।।

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