प्रवृत्ति..
मै मानता हूं या ये कहो कि महसूस कर रहा हूं कि मैं कि मै खुद से खफा हुँ, और इसका कारण भी जानता हूं । कारण है कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ,मैं सबसे प्यार करता हूँ,तुम सब कभी कभी कही खो जाते हो, और इस दौरान सतत रुप से मैं स्वयं को भूल जाता हूँ, मैं स्वयंप्रकाश हूँ, मैं तुमसे भी प्रेम करूँगा ओह करने की बात कहा से आ गयी, प्रवृत्ति है प्रेम मेरी,प्रवृति है कण्टक हुँ कभी कभी! ये तुम समझो तुम्हे समझा नही सकता मैं। तुम खुद ही समझ जाओगे,इतनी सत्यता है।