खत..2

देर-अबेर ही सही,
एक क्षण आएगा जब तुम्हे,
ये एहसास होगा,कि मैं
तुम्हारे जीवन मे यूँही फेंक नही दिया गया था!

कुछ पददलित पड़ी तुम्हारी,
प्रतिभा को निखारने आया था,
औऱ इतना तो निश्चित है
कि तुम्हे एक दिन चमकना है!

तुम्हे जोर की चमाट मारनी है
उन बुझदिलो को जो,
हमेशा हर मोड़ पे एक
रोड़ा ही डाले,कभी हंस कर तो कभी रो-रो कर।।

हांलाकि ये क्षण कठिन है
किन्तु मेरे पके हुए बाल और
आंख में लगे मोटे लेंस की कसम,
तुम्हे तुम्हारी मंज़िल तुम्हारी ख्वाहिश
निश्चित मिलेगी, निश्चित मिलेगी!
तुम्हे तुम्हारे जीवन के सारे,
उत्कर्ष प्राप्त होंगे,और वो
जिन्होंने हर कदम पर तुम्हे रोका,
निराशा के बीज बोएं, उनकी
गोबर भरी अक्ल में भी पुष्प खिलेंगे!

मैं रहूँ या न रहूँ,
ये बात जरूर होगी,
जरूर होगी! जरूर होगी!

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