प्ररम्भ दहेज से!
क्यों लेकर दहेज ही,
तुम्हारे हाथ मे राडो की घड़ी आती है,
मोटर के मालिक बनोगे,क्या भिक्षा से?
क्या यही तुम्हारी शिक्षा है?
घर मे कार, सोफा,टेलीविजन और अन्य
सामग्रियां आती हैं।
क्या तुम नपुंसक हो,
कायर हो,भीरु हो,
कि देवी कन्या-धन पाकर
भी लालायित रहते हो।
हे तरुण सुनो तुम भारत के
ये बात बहुत है कष्टपूर्ण!
तुम इतने कमजोर हुए कि
अपने कुटुम्ब में घोषित नही कर सकते कि
दहेज में एक रत्ती भी नही लूंगा।
इस वक़्त हमारी संस्कृति में मात्र
तीन ही कुष्ट है प्रिय,एक दहेज ,एक है जाति और एक
है सम्प्रदाय!
जब आज भारत मे युवाशक्ति पूरे संसार से ज्यादे है!
तब क्यों दहेज लेकर
मानवता के मुख पर कालिख पोतते जा रहे हो,
प्रतिबद्ध हो जाओ,
कह दो घर मे,नही करूँगा मैं विवाह
यदि दहेज की एक रंच-मात्र भी राशि ली गयी।
बनो तुम वीर
त्यागो दहेज,कन्या का सम्मान करो
माँ भारती की लाज रखो।
और ये तुम कर सकते हो
है क्षमता तुममे,तुम करोगे भी।
त्यागो दहेज,जो मांगे दहेज,जो दे दहेज
उसे समाज से बहिष्कृत करो,
क्योंकि अभी नही तो कभी नही।
तुम्हारे हाथ मे राडो की घड़ी आती है,
मोटर के मालिक बनोगे,क्या भिक्षा से?
क्या यही तुम्हारी शिक्षा है?
घर मे कार, सोफा,टेलीविजन और अन्य
सामग्रियां आती हैं।
क्या तुम नपुंसक हो,
कायर हो,भीरु हो,
कि देवी कन्या-धन पाकर
भी लालायित रहते हो।
हे तरुण सुनो तुम भारत के
ये बात बहुत है कष्टपूर्ण!
तुम इतने कमजोर हुए कि
अपने कुटुम्ब में घोषित नही कर सकते कि
दहेज में एक रत्ती भी नही लूंगा।
इस वक़्त हमारी संस्कृति में मात्र
तीन ही कुष्ट है प्रिय,एक दहेज ,एक है जाति और एक
है सम्प्रदाय!
जब आज भारत मे युवाशक्ति पूरे संसार से ज्यादे है!
तब क्यों दहेज लेकर
मानवता के मुख पर कालिख पोतते जा रहे हो,
प्रतिबद्ध हो जाओ,
कह दो घर मे,नही करूँगा मैं विवाह
यदि दहेज की एक रंच-मात्र भी राशि ली गयी।
बनो तुम वीर
त्यागो दहेज,कन्या का सम्मान करो
माँ भारती की लाज रखो।
और ये तुम कर सकते हो
है क्षमता तुममे,तुम करोगे भी।
त्यागो दहेज,जो मांगे दहेज,जो दे दहेज
उसे समाज से बहिष्कृत करो,
क्योंकि अभी नही तो कभी नही।
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