ख्वाहिशें!
एक रावण जैसा अधर्मी जिसने सीता को स्पर्श तक नही किया,
और एक राम जैसा धर्म संस्थापक जिसने भरे बाजार जानकी को अग्नि में धकेल दिया!
ये जो हमारी ख्वाहिशें हैं न! अच्छी हो या बुरी ये होती है इसलिये की हमें एक इतना अमिट कलंक लगा सके जिसे मिटाने के लिए पुनः कुछ ख्वाहिशें पाली जाएँ...
जीवन कि एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि कुछ लोग हमेशा काले होते हैं जो हमारा छिटपुट नुकसान करते हैं किन्तु कुछ गोरे लोग भी होते है-तथाकथित सॉफिस्टिकेटेड लोग जिनको प्रसन्न करने में हम जीवन भर कोम्प्रोमाईज़ करते रहते हैं किसी वक़्त थोड़ा चुके कि ऐसा डंक मारते हैं कि काला कोबरा भी लज्जा से डूब मरे उस विष की तीव्रता को देखकर इसलिए सन्तुलन बना कर रहिये...
मुझे फक्र है कि मैं काला हुँ, चरित्रहीन हुँ ,मैंने धर्म के ठेकेदार पंडितों को प्रत्येक क्षण मानवीय सम्बन्धों का कत्ल कर के भी बड़े ठाट से मुस्कुराते देखा है...
वक़्त वक़्त की बात है मेरे दोस्त
.......... वक़्त वक़्त की बात है!
पत्नी को जुए में हार जाए ऐसे व्यक्ति
को भी हमने धर्मराज कहा है!
वक़्त वक़्त की बात है! मेरे दोस्त!
और एक राम जैसा धर्म संस्थापक जिसने भरे बाजार जानकी को अग्नि में धकेल दिया!
ये जो हमारी ख्वाहिशें हैं न! अच्छी हो या बुरी ये होती है इसलिये की हमें एक इतना अमिट कलंक लगा सके जिसे मिटाने के लिए पुनः कुछ ख्वाहिशें पाली जाएँ...
जीवन कि एक कड़वी सच्चाई ये भी है कि कुछ लोग हमेशा काले होते हैं जो हमारा छिटपुट नुकसान करते हैं किन्तु कुछ गोरे लोग भी होते है-तथाकथित सॉफिस्टिकेटेड लोग जिनको प्रसन्न करने में हम जीवन भर कोम्प्रोमाईज़ करते रहते हैं किसी वक़्त थोड़ा चुके कि ऐसा डंक मारते हैं कि काला कोबरा भी लज्जा से डूब मरे उस विष की तीव्रता को देखकर इसलिए सन्तुलन बना कर रहिये...
मुझे फक्र है कि मैं काला हुँ, चरित्रहीन हुँ ,मैंने धर्म के ठेकेदार पंडितों को प्रत्येक क्षण मानवीय सम्बन्धों का कत्ल कर के भी बड़े ठाट से मुस्कुराते देखा है...
वक़्त वक़्त की बात है मेरे दोस्त
.......... वक़्त वक़्त की बात है!
पत्नी को जुए में हार जाए ऐसे व्यक्ति
को भी हमने धर्मराज कहा है!
वक़्त वक़्त की बात है! मेरे दोस्त!
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