समस्त-सूत्र!

प्रत्येक हाड़-मांस की
पोटली पहली दफा अमीबा ही
होती है,उसके बाद विभिन्न प्रजातियों
के साथ अनन्त रूप.....

और सबसे छोटे स्तर पर
क्वांटा या उससे भी छोटा कोई
सम्भावित कड़, ये पदार्थ के स्तर पर है
यहीं से आइंस्टीन साहब की
सापेक्षता विदा हो जाती है!

और आता है प्रकाश में
एक काला छेद!...
ये काला छेद मूलतः समय
औऱ स्थान का सम्बंध निर्धारित करता है!

और यहीं से एक संपूर्ण
सूत्र प्रतिपादित होता है
जो हमारे समस्त प्रश्नों का
उत्तर देने की क्षमता लिए हुए है
चाहे अध्यात्म हो या विज्ञान!

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