वृक्ष पिता जननी पृथ्वी!

पिता जी कहते हैं,
"जिस रोग का इलाज किसी भी वैद्य के पास नही,
उसका इलाज भी बाप के पास होता है!"
क्योंकि बाप हमेशा बाप होता है!
और बाप का सार बाप बनकर ही प्राप्त होता है!
माँ की अद्भुत मुस्कान!
सृजन करती ही जाती है!

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