हे! माधव!

प्रत्येक अवसर चूक जाने पर भी,प्रत्येक स्थान से परित्यक्त होने के बाद मुझे एक जगह हमेशा सुकून मिला,और वो स्थान है माँ-बाप की छाँव, और मैंने इसके प्रत्युत्तर मे कुछ भी नही किया अब तक!
हे माधव! मुझे इस योग्य बनाये जिससे मैं अपने साथ,अपनी अंतरात्मा के साथ न्याय कर सकूँ!

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