बिन्दु-जिसे पकड़ना है तुम्हे!

रेगिस्तान में चल रहे तुम दो घण्टे से,जल से तिल-तिल प्यासे हो,उस वक्त बड़ी कठिनाई से जल मिले तो जिस मनोयोग से पीते हो उस जल को,अबसे हमेशा जल वैसे ही पियो।
कण्टक भरे गर्म रास्ते पर चलने पे शीतल घांस भरी भूमि मिले तो पाँव जिस तरह रखते हो,अबसे प्रतिपल उसी भाव से प्रत्येक क्षण भूमि पे पाँव रखो!
इसी तरह सांस,नींद और विभिन्न बिंदुओं को पकड़ो और प्रेममय-अनुग्रहपूर्ण जीवन जियो...
प्रत्येक बिंदुओं को तलाशो,और जीवन को मुक़म्मल करो..

जय श्री कृष्ण



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