निगाहें!
निगाहें आजकल सड़कों पर
पोस्टमार्टम करती हैं,
इसीलिए बेटियाँ मुँह बांध-
घर से आजकल निकलती है!
निगाहें नीची भी होती,
निगाहें ऊंची भी होती!
कोई-कोई निगाह तो,
बस काम-भर उठती!
निगाहें होती है मुखबीर,
निगाहे, सुरवीर भी हैं,
निगाहें-भीरु, भी है!
बेशर्म निगाहें, बेबाक निगाहें,
अवाक निगाहें, आगाज निगाहें!
नापाक निगाहें,बेपनाह निगाहें!
कहीं पर लुच्चा,
कहीं पर कुत्ता,
कहीं भेड़िया,
कहीं कुकुरमुत्ता!
निगाहें शबनमी! कही,
कहीं पर कमलनयन भी हैं
कहीं पर मृगनयनी है तो कहीं
बिल्कुल ही सरल...
निगाहें मां की भी होती,
निगाहें बहन की भी है!
निगाहों में ही है कुटुंब,
निगाहों में नफरत भी है!
निगाहों की कशिश मे,
ही कही बर्बाद जीवन है!
कई निगाहों ने तो,बस
निरा-इंतज़ार जाना,
निगाहें बन्धन में डाले
कभी ये मुक्त भी कर दे!
जरूरत है निगाहों को
निगाहों की खबर बस हो!
पोस्टमार्टम करती हैं,
इसीलिए बेटियाँ मुँह बांध-
घर से आजकल निकलती है!
निगाहें नीची भी होती,
निगाहें ऊंची भी होती!
कोई-कोई निगाह तो,
बस काम-भर उठती!
निगाहें होती है मुखबीर,
निगाहे, सुरवीर भी हैं,
निगाहें-भीरु, भी है!
बेशर्म निगाहें, बेबाक निगाहें,
अवाक निगाहें, आगाज निगाहें!
नापाक निगाहें,बेपनाह निगाहें!
कहीं पर लुच्चा,
कहीं पर कुत्ता,
कहीं भेड़िया,
कहीं कुकुरमुत्ता!
निगाहें शबनमी! कही,
कहीं पर कमलनयन भी हैं
कहीं पर मृगनयनी है तो कहीं
बिल्कुल ही सरल...
निगाहें मां की भी होती,
निगाहें बहन की भी है!
निगाहों में ही है कुटुंब,
निगाहों में नफरत भी है!
निगाहों की कशिश मे,
ही कही बर्बाद जीवन है!
कई निगाहों ने तो,बस
निरा-इंतज़ार जाना,
निगाहें बन्धन में डाले
कभी ये मुक्त भी कर दे!
जरूरत है निगाहों को
निगाहों की खबर बस हो!

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