भाई-माई

जब मैं शैशवकाल में था तो मैं सबको भाई कहता था,भाई मेरा प्रिय शब्द है,बड़े भैया श्री सुधाकर जी से तो बाद में घनिष्ठता हुई किन्तु छोटे भैया श्री दिवाकर जी से बचपन से ही माँ-सा प्रेम रहा,उन्होंने हमेशा गुरु की तरह,मित्र की तरह अभिभावक की तरह मेरे प्रत्येक कार्य मे सहयोग किया आज २८ फरवरी को उनका जन्मदिन है! मैं प्रार्थना करता हूँ की उन्हें शारिरिक मानसिक सामाजिक पारिवारिक समस्त सन्तुष्टि प्राप्त होती रहे।
छोटे भैया बड़े भैया का बहुत सम्मान करते है
बड़े भैया एक जीवित सन्त है,जिनमे कोई बुराई नही है,मुझे स्मरण नही कि कभी वो मुझे डांटे तक हो।
मैं धन्य हूँ की मुझे इतने महापुरुष भाई मिले हैं।
हे योगेश्वर आपको कोटि कोटि धन्यवाद!
बड़े भैया पिता तुल्य,
और छोटे भैया माता तुल्य!
आप दोनों सलामत रहें।
औऱ दोनो प्यारी भाभी माँ और चारो बच्चे हमेशा उन्नति करें!

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