खत...४
श्रद्धेया!
मेरा चक्र पूर्ण होना था,मुझे जाना था,आपने कहा मुझसे की मैं
प्रभाकर हूँ, मुझे किसी को अंधेरे में छोड़ नही जाना चाहिए!
प्रकाश तो था किंतु थोड़ा भ्रम था आपको,आप परछाई की तरफ देख रही थी!
मैं भी बहुत पतित हुआ आपके जीवन मे प्रकाश लाने के वास्ते
मुझे उस वक़्त कठोर वचन कहना पड़ा!
"आप अपनी सड़ी हुई सूरत मुझे कभी न दिखाए! और न ही मुझसे सम्पर्क जोड़ने का प्रयास करे!"
इतना अहंकार युक्त वचन मैं बोला जीवन भर ये कष्ट सालता रहेगा मुझे!
किन्तु असत्य नही बोला था,मैंने
आपके अंदर आत्मविश्वास और तेज भरा हुआ है जब,
तो सड़ी-सी शिकायती सूरत क्यों!
आपको अपनी मंज़िल हासिल करनी है
उस चेहरे को सूरज-सा चमकदार बनाना है
मैं नही हूँ अब आपके साथ!
किन्तु मुझे अटल श्रद्धा है कि आपको आपकी मन्ज़िल मिलेगी, एक करारा तमाचा मारना है आपको मुझे भी,और उन्हें भी जिन्होंने आपको कमतर आंका! मुझे इसलिये कि मैंने कटु वचन बोले!
निःसंदेह आपके जीवन का सूर्योदय होने वाला है,पौ-फट रही है अभी मैं देख सकता हूँ!
मैं रहूँ या न रहूँ ,
ये बात होनी चाहिए!
वक़्त बस अब आ गया,
सूरत बदलनी चाहिए!
चमचमाते एक सितारे को!
जग को प्रकाशित करना चाहिए!
मेरा कार्य तभी पूर्ण होगा!
अभी कुछ तो अधूरा रह गया है!
मैं कत्तई नही रहूँगा उस जीवन-धारा में
किन्तु वो जीवन धारा महकनी चाहिए!
वो सड़ी हुई सड़ाँन्ध, महक,महक,महक!.....
.....
.....
में बदलनी चाहिए!
ये बात होनी चाहिए!
ज़िद आपकी पूर्ण होनी चाहिए!
धन्यवाद!
आपका जीवन मंगलमय हो!
मेरा चक्र पूर्ण होना था,मुझे जाना था,आपने कहा मुझसे की मैं
प्रभाकर हूँ, मुझे किसी को अंधेरे में छोड़ नही जाना चाहिए!
प्रकाश तो था किंतु थोड़ा भ्रम था आपको,आप परछाई की तरफ देख रही थी!
मैं भी बहुत पतित हुआ आपके जीवन मे प्रकाश लाने के वास्ते
मुझे उस वक़्त कठोर वचन कहना पड़ा!
"आप अपनी सड़ी हुई सूरत मुझे कभी न दिखाए! और न ही मुझसे सम्पर्क जोड़ने का प्रयास करे!"
इतना अहंकार युक्त वचन मैं बोला जीवन भर ये कष्ट सालता रहेगा मुझे!
किन्तु असत्य नही बोला था,मैंने
आपके अंदर आत्मविश्वास और तेज भरा हुआ है जब,
तो सड़ी-सी शिकायती सूरत क्यों!
आपको अपनी मंज़िल हासिल करनी है
उस चेहरे को सूरज-सा चमकदार बनाना है
मैं नही हूँ अब आपके साथ!
किन्तु मुझे अटल श्रद्धा है कि आपको आपकी मन्ज़िल मिलेगी, एक करारा तमाचा मारना है आपको मुझे भी,और उन्हें भी जिन्होंने आपको कमतर आंका! मुझे इसलिये कि मैंने कटु वचन बोले!
निःसंदेह आपके जीवन का सूर्योदय होने वाला है,पौ-फट रही है अभी मैं देख सकता हूँ!
मैं रहूँ या न रहूँ ,
ये बात होनी चाहिए!
वक़्त बस अब आ गया,
सूरत बदलनी चाहिए!
चमचमाते एक सितारे को!
जग को प्रकाशित करना चाहिए!
मेरा कार्य तभी पूर्ण होगा!
अभी कुछ तो अधूरा रह गया है!
मैं कत्तई नही रहूँगा उस जीवन-धारा में
किन्तु वो जीवन धारा महकनी चाहिए!
वो सड़ी हुई सड़ाँन्ध, महक,महक,महक!.....
.....
.....
में बदलनी चाहिए!
ये बात होनी चाहिए!
ज़िद आपकी पूर्ण होनी चाहिए!
धन्यवाद!
आपका जीवन मंगलमय हो!

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