सम्यक-स्मृति
याद रहना कोई तथ्य अच्छी बात है,
किन्तु यदि भूले ही न कुछ भी तो,
बात तकलीफ देती है,
यदि आपको आपकी चेतना की आयु स्मृति में आ जाये,
फिर सम्बंधित हो पाना किसी से बहुत मुश्किल हो जाता है!
प्रत्येक व्यक्ति, जीवित हो या मृत समान सम्बन्ध होते है...
इस बिंदु पर आने के उपरांत,
प्रत्येक तथ्य(चेतन,अवचेतन, अचेतन) से सम्यक सम्बंधित रहना आवश्यक है,नही तो भयंकर निद्रा में जाने की बात हो जाती है...
सायकोसिस होना प्रारंभ होता है!
आसपास लोग आपके बिलकुल सद्धह-स्नात व्यवहार से असहज होते है!
अतः सम्यकता आवश्यक है
आपके रंगमंचीय अभिनय के लिए!
क्योंकि फिर एक ही भौतिक क्रिया शेष रहती है,
महाभिनिष्क्रमण! की!
और उसके लिए भी सम्यकता आवश्यक है!
किन्तु यदि भूले ही न कुछ भी तो,
बात तकलीफ देती है,
यदि आपको आपकी चेतना की आयु स्मृति में आ जाये,
फिर सम्बंधित हो पाना किसी से बहुत मुश्किल हो जाता है!
प्रत्येक व्यक्ति, जीवित हो या मृत समान सम्बन्ध होते है...
इस बिंदु पर आने के उपरांत,
प्रत्येक तथ्य(चेतन,अवचेतन, अचेतन) से सम्यक सम्बंधित रहना आवश्यक है,नही तो भयंकर निद्रा में जाने की बात हो जाती है...
सायकोसिस होना प्रारंभ होता है!
आसपास लोग आपके बिलकुल सद्धह-स्नात व्यवहार से असहज होते है!
अतः सम्यकता आवश्यक है
आपके रंगमंचीय अभिनय के लिए!
क्योंकि फिर एक ही भौतिक क्रिया शेष रहती है,
महाभिनिष्क्रमण! की!
और उसके लिए भी सम्यकता आवश्यक है!
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