गम की मुस्कान!I

गम आया, कल मुझसे मिलने,
गमगीन करना था मुझे, उसको
मैने बिठाया उसे,आराम कुर्सी पर
थोड़ा अचंभित था वो,
बेफिक्र देख कर मुझको,
अकुलाहट थी उसके मन मे,
कुछ पूछना था उसको,शायद वजह!
पूछा झट से,मैंने कहा अभी तो रहोगे ही,
नाश्ता वगैरह कर लो आराम से बताते हैं,
फिर कहा मैंने उसे,"अभी-अभी खुशी को विदा किया है!
वो भी तुम्हारी तरह आयी थी,कुछ वक्त तक रही फिर वक़्त हो गया,वही तुम्हारा भी होगा!"

मेरे जवाब से गम भी मुस्कुराने लगा
कहा, यार पहली दफा मुझे किसी ने मुस्कान दी,
तुम तो दोस्त लगते हो,लेकिन अब परवाह हो रही
कि साथ रहूँ या न रहूँ क्योंकि मैं तो गम हूँ न!

मैंने कहा देखो बिस्तर लगा है आराम से सो जाओ,
वक़्त होगा तो चले जाना,अबकी तो गम के आंख में आँसू आ गया,उसे देख मेरी भी आंख अश्रुपूरित हुईं ओर मैं उसे सुलाने
के लिये कुछ लोरियां सुनाने लगा,फिर वो सो गया!
आजकल बहुत मस्ती से रहता है वो मेरे साथ!

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