विरह के पार!

तुमसे न कोई शिकवा,
न गिला,न कोई भाव ही,
अब हर निकलने वाली सांस,
तुमसे जुड़ी हर तथ्यों की।।

और प्रत्येक आने वाली सांस
मेरे कृष्ण की अनुभूति!
दो-चार-दस दिन,
या फिर जितना भी वक़्त लगे

निकलती हुई साँसों के साथ
तुमसे मेरी रूह छूट जाएगी!
और धीरे-धीरे इन निकलने वाली
सांसों की जलन भी शीतल हो जाएगी!

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