यकीन!

यकीनन, यकीन
हकीम से बढ़कर है!
यकीन सारी दवाओं से बेहतर है,
जो रह जाते है जीवन में
सन्देहों के घेरे में ही!
कांटो का हार पहन कर
खुद गर्दन काटते है!

यकीन आये कैसे ये बहुत सरल हैं
हां सन्देह को बुलाने में भी जटिलता है,
औऱ ये एक ऐसी बला है,जो आने का बाद जाती नही।
यकीन कर लेना सरल है,अत्यधिक सरल,
इस प्रक्रिया में जटिलता की लेशमात्र भी उपस्थिति नही रहती है,
औऱ यदि है जटिलता का एक भी अंश है तो आवश्यक है कि आप अपने यकीन की जांच करें,कहीं चूक हो रही है!

  • अन्यथा,यकीन,प्रेम,और प्रस्फुटन बिल्कुल प्राकृतिक है,अप्राकृतिक है यदि कुछ तो सारे विकार, और वो भी इसलिये क्योंकि वो सहज श्रोत, आपकी अंतरात्मा तक आपको कभी पहुंचने ही नही देंगे!

और इस तरह आप सदियों भृम के आवरण से ढके रह जाते है एवं सत्य की अनुभूति आपसे हो ही नही पाती!

इसलिए यकीन यकीनन अतिआवश्यक है!

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