खत!
तेरे ख्वाबों की दुनिया में,
अगर मैं फिर मिल भी जाऊं,
अजनबी जानकर मुझको
किनारे छोड़ देना!
दीवानों की मेहफिल में मैं
रहता हूँ मेरे यारा,
दीवाना जानकर मुझको
अकेला छोड़ जाना।।
अब तो मयकदे में ही
कटती हर शाम मेरी..
शराबी जान कर मुझको
अकेला छोड़ जाना।।
दुनिया की ठोकरें
भी तुमसे हसीन है
मेरे दोस्त,कम से कम
यकीन तो है उनको मुझपर!!
अगर मैं फिर मिल भी जाऊं,
अजनबी जानकर मुझको
किनारे छोड़ देना!
दीवानों की मेहफिल में मैं
रहता हूँ मेरे यारा,
दीवाना जानकर मुझको
अकेला छोड़ जाना।।
अब तो मयकदे में ही
कटती हर शाम मेरी..
शराबी जान कर मुझको
अकेला छोड़ जाना।।
दुनिया की ठोकरें
भी तुमसे हसीन है
मेरे दोस्त,कम से कम
यकीन तो है उनको मुझपर!!
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