भगवान!
कैसे कह दु तुम्हे,
खुद कृष्ण पधारे हैं और
संग में उनके माँ राधिका आयी
इतना दुलार किये!
मैं बालक बन देखा!
रास-रचाते रहें स्वयं-
भोजन भी पकाते रहे,
आज पेट भर खाया!
माँ की ममता पाया!
अब बस अनुग्रह में
ये रोम-रोम मेरा!
और हो भी क्यों ना ऐसा
नारायण हैं आयें!
हे नाथ तुम्ही तुम हो!
अब बस तुम्ही तो हो!
मैं दीन हूँ!
तुम दीनानाथ हो!
दीनानाथ हो!
खुद कृष्ण पधारे हैं और
संग में उनके माँ राधिका आयी
इतना दुलार किये!
मैं बालक बन देखा!
रास-रचाते रहें स्वयं-
भोजन भी पकाते रहे,
आज पेट भर खाया!
माँ की ममता पाया!
अब बस अनुग्रह में
ये रोम-रोम मेरा!
और हो भी क्यों ना ऐसा
नारायण हैं आयें!
हे नाथ तुम्ही तुम हो!
अब बस तुम्ही तो हो!
मैं दीन हूँ!
तुम दीनानाथ हो!
दीनानाथ हो!
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