परावर्तन!I
यदि आप किसी को पतित करना चाहते हैं तो पहले आप स्वयं पतित होइये।
यदि आप प्रेम करना चाहते है,तो स्वयं को पहले करिये पूर्ण मनोयोग से प्रेम!
यदि नफरत फैलाने के फिराक में है तो पहले स्वयं के अन्तस् में नफरत फैलाइये।
यदि आप अपमानित करना चाह रहे हैं तो पहले अपमानित होइये।
गङ्गा पतित-पावनी हैं इसलिए पूजी जाती हैं सदियों से,
कैसी उल्टी बात है,कि संसार का पाप भी धोती है स्वयं के जल से और पवित्र भी है!
किन्तु ये सत्य है,गङ्गा की पवित्रता है ही इस हेतू कि वो सबको पाप मुक्ति देती हैं।
और अब आपको तय करना है..
क्षमा या प्रतिशोध,
प्रेम या घृणा,
उपकार या अपकार
भलाई या बुराई आदि आदि
जो भी आप देना चाहते हैं,बाटना चाहते हैं पहले स्वयं की धारिता को भरेंगे तभी उलट सकेंगे..वितरित कर सकेंगे.. आप स्वतन्त्र है चुनाव के लिए...आपका जीवन मुझे हस्तक्षेप नही करना तनिक भी।
आप किसी के घर मे पुष्प फेंकते हैं यदि तो अर्थ स्पष्ट है कि आप के घर मे पुष्पों की अधिकता है,एवं यदि कूड़ा फेंकते है तोभी स्पष्टतः आपके घर मे कूड़ा भरा होगा...
किसी को बद्दुआ दे रहे तो बद्दुआओं से भरे आप हैं,
किसी को शुभासन्सा दे रहे तो शुभ से परिपूर्ण आप हैं,
किसी का मार्ग अवरुद्ध कर रहें तो,आपके सारे मार्ग अवरुद्ध हैं इसलिए...
किसी को कैद कर रहें हैं आप इसलिये क्योंकि आप अपने विचारों के कैदी हैं।
बात अत्यधिक स्पष्ट है,
किन्तु दृष्टि धूमिल है और
उस धूल-कड़ो को स्वच्छ करने
की जहमत कौन उठाये...है न!
एक सत्य ये भी है कि
आपके माँ-बाप के मृत्यु के उपरांत
वो लोग जिंदा हो जाते हैं और ज्यादा आपमें
इसलिये कार्य कुछ ऐसा करिये जिससे उन्हें ज़िंदा न होना पड़े,
और आपकी श्राद्ध सफल हो,
उनकी आत्मा को उचित स्थान मिले।
यदि आप प्रेम करना चाहते है,तो स्वयं को पहले करिये पूर्ण मनोयोग से प्रेम!
यदि नफरत फैलाने के फिराक में है तो पहले स्वयं के अन्तस् में नफरत फैलाइये।
यदि आप अपमानित करना चाह रहे हैं तो पहले अपमानित होइये।
गङ्गा पतित-पावनी हैं इसलिए पूजी जाती हैं सदियों से,
कैसी उल्टी बात है,कि संसार का पाप भी धोती है स्वयं के जल से और पवित्र भी है!
किन्तु ये सत्य है,गङ्गा की पवित्रता है ही इस हेतू कि वो सबको पाप मुक्ति देती हैं।
और अब आपको तय करना है..
क्षमा या प्रतिशोध,
प्रेम या घृणा,
उपकार या अपकार
भलाई या बुराई आदि आदि
जो भी आप देना चाहते हैं,बाटना चाहते हैं पहले स्वयं की धारिता को भरेंगे तभी उलट सकेंगे..वितरित कर सकेंगे.. आप स्वतन्त्र है चुनाव के लिए...आपका जीवन मुझे हस्तक्षेप नही करना तनिक भी।
आप किसी के घर मे पुष्प फेंकते हैं यदि तो अर्थ स्पष्ट है कि आप के घर मे पुष्पों की अधिकता है,एवं यदि कूड़ा फेंकते है तोभी स्पष्टतः आपके घर मे कूड़ा भरा होगा...
किसी को बद्दुआ दे रहे तो बद्दुआओं से भरे आप हैं,
किसी को शुभासन्सा दे रहे तो शुभ से परिपूर्ण आप हैं,
किसी का मार्ग अवरुद्ध कर रहें तो,आपके सारे मार्ग अवरुद्ध हैं इसलिए...
किसी को कैद कर रहें हैं आप इसलिये क्योंकि आप अपने विचारों के कैदी हैं।
बात अत्यधिक स्पष्ट है,
किन्तु दृष्टि धूमिल है और
उस धूल-कड़ो को स्वच्छ करने
की जहमत कौन उठाये...है न!
एक सत्य ये भी है कि
आपके माँ-बाप के मृत्यु के उपरांत
वो लोग जिंदा हो जाते हैं और ज्यादा आपमें
इसलिये कार्य कुछ ऐसा करिये जिससे उन्हें ज़िंदा न होना पड़े,
और आपकी श्राद्ध सफल हो,
उनकी आत्मा को उचित स्थान मिले।

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