गुरुदेव-सांड..१
मैं बाजे-गाजे के साथ स्वयं के विवाह में जा रहा हूँ आपके घर लोग जश्न मना रहे हैं मैं भी मन्त्र-मुग्ध हूँ,शायद मेरी आखिरी ख्वाहिश पूरी हो रही है... इसी दिन का तो इंतजार था मुझे..सब कुछ बेहद हसीन। तुम्हे अपनी दुल्हन के रूप में देखना महसूस करना और फिर मुक्ति समस्त ख्वाहिशो से..इसमे मैं आपको भी खूब प्रसन्नचित्त देखता हूँ...विवाह सम्पन्न हुआ। सम्मानित लोग बधाइयाँ दे रहे है,प्रसन्न भी खूब हैं। अरे ये क्या? गुरुदेव कब आ गए कुछ तो गड़बड़ है गुरूदेव के दर्शन होना इस समय अनिष्ट का सूचक है। भड़ास भरी लाठी मेरे पिछवाड़े पर पड़ी पिता जी अपने पुलिसिया अंदाज में,उठ ये समय है सोने का। मैं तो अर्श से फ़र्श पर आ गया। गलती मेरी है जब गुरुदेव अपनी व्यवस्था नही कर सके तो मेरी व्यवस्था कैसे होगी! जय गुरुदेव!