प्रेम का ढंग!
प्रेम दरसल दूसरी मृत्यु है,
प्रेम में नित-नित मृत्यु होती है,
अकड़,शान-ओ-शौक़त,घमण्ड
ईर्ष्या,स्पृहा,घृणा,द्वेष ,आत्माभिमान
स्वाभिमान.... सबकी मृत्यु होती है!
यदि आप प्रेम में है और इनमें से
कुछ भी शेष है आपमें, तो आवश्यकता है
आप अपने समर्पण की विवेचना करें,
सब लुटा नही गर,
तो प्रेम कैसा,पाखण्ड है यदि शेष बचा है कुछ तो!
एक क्षण का प्रेम ही
इतना काबिल है की मृत्यु हो,
और मृत्यु आवश्यक है! क्योंकि
उसके बाद आपका एक नया जन्म होता
है,तब पहली दफा आप द्विज होते है!
इसलिये मोहब्बत आपको यदि
वैसी ही जिंदगी बख्शे तो!
वो मोहब्बत नही रही होगी...
साहचर्य,व्यापार या कुछ और अनेक नाम है उसके...
हो सकते है,किन्तु प्रेम नही!
प्रेम आपको द्वैत से अद्वैत की
तरफ ले जाता है!
और प्रेम प्रारम्भ ही है मात्र!
उसके बाद अनन्त व्योम आपका
स्वागत करेगा!
अगली बार अपने प्रेमी
या प्रेमिका से ढंग से मिलिये!
जिससे मृत्यु का प्रारंभ हो सके!
प्रेम में नित-नित मृत्यु होती है,
अकड़,शान-ओ-शौक़त,घमण्ड
ईर्ष्या,स्पृहा,घृणा,द्वेष ,आत्माभिमान
स्वाभिमान.... सबकी मृत्यु होती है!
यदि आप प्रेम में है और इनमें से
कुछ भी शेष है आपमें, तो आवश्यकता है
आप अपने समर्पण की विवेचना करें,
सब लुटा नही गर,
तो प्रेम कैसा,पाखण्ड है यदि शेष बचा है कुछ तो!
एक क्षण का प्रेम ही
इतना काबिल है की मृत्यु हो,
और मृत्यु आवश्यक है! क्योंकि
उसके बाद आपका एक नया जन्म होता
है,तब पहली दफा आप द्विज होते है!
इसलिये मोहब्बत आपको यदि
वैसी ही जिंदगी बख्शे तो!
वो मोहब्बत नही रही होगी...
साहचर्य,व्यापार या कुछ और अनेक नाम है उसके...
हो सकते है,किन्तु प्रेम नही!
प्रेम आपको द्वैत से अद्वैत की
तरफ ले जाता है!
और प्रेम प्रारम्भ ही है मात्र!
उसके बाद अनन्त व्योम आपका
स्वागत करेगा!
अगली बार अपने प्रेमी
या प्रेमिका से ढंग से मिलिये!
जिससे मृत्यु का प्रारंभ हो सके!

Comments