अंत्योदय!
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी का दर्शन है! समाज के अंतिम व्यक्ति का उदय या किसी भी सामाजिक सेवा का लाभ समाज का अंतिम व्यक्ति भी उतना ही पाए जितना प्रथम व्यक्ति! मेरे विचार से यदि तंत्र को पवित्र किया जाए तो पण्डित जी के विचार स्वतः लागू हो जायेंगे! एवं तंत्र के शुद्धिकरण के लिये शिक्षा एवं चिकित्सा ये दोनों महती भूमिका निभाते हैं! शिक्षा से शिक्षक एवं शिक्षार्थी तथा चिकित्सा से चिकित्सक एवं रोगी सम्बंधित हैं। शिक्षा एवं चिकित्सा ये दोनों मात्र प्रत्यय है स्थूल रूप से इन्हें विशाल बनाने वाले आधारस्तम्भ तो व्यक्ति ही है! व्यक्ति रोगी,शिक्षार्थी,चिकित्सक एवं शिक्षक या अन्य कोई भी हो सकता है। जिस समाज को उन्नति करनी है उसे सर्वप्रथम अपने शिक्षक और चिकित्सक को सर्वाधिक आदर देना चाहिए जिससे उनका उत्साहवर्धन होता रहे। कृषक का उल्लेख नही किया मैंने उसका कारण है कृषक बहुत महान होता है किंतु उसके पाल्यों को यदि शिक्षा नही मिली तो उसकी आने वाली पीढ़ी गुलाम होगी ये निश्चित है जो उसके लिये दुर्भाग्यपूर्ण होगा। किसान,शिक्षक एवं चिकित्सक यदि ये तीन ही समाज के प्रमुख रहेंगे तो समाज को पूरा विश्व आत्मसात क...